गुजरातराष्ट्रीय

गुजरात की यें पांच सीटेो के लिये है कांटे की टक्कर…!

गुजरात की यें पांच सीटेो के लिये है कांटे की टक्कर...!

अगले कुछ दिनों में चुनावों का सामना करने जा रहे गुजरात में विधानसभा की लगभग एक दर्जन सीटें ऐसी हैं, जिन्हें पिछले डेढ़ दशक से सत्ता में होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) जीतने में विफल रही है. हालांकि इसी अवधि में राज्य की तकरीबन चार दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी जीत का इंतजार कर रही है.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, साल 1998 से लेकर 2017 तक गुजरात में हुए पांच विधानसभा चुनावों में बीजेपी जिन सीटों को जीत नहीं सकी हैं उनमें बनासकांठा जिले की दांता, साबरकांठा की खेडब्रह्मा, अरवल्ली की भिलोड़ा, राजकोट की जसदण और धोराजी, खेड़ा जिले की महुधा, आणंद की बोरसद, भरूच की झगाडिया और तापी जिले की व्यारा शामिल हैं. इनमें से दांता, खेडब्रह्मा, भिलोड़ा, झागड़िया और व्यारा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें हैं, जबकि जसडण, धोराजी, महुधा और बोरसड सामान्य श्रेणी में आती हैं.

वलसाड जिले की कपराडा भी एक ऐसी आरक्षित (अनुसूचित जनजाति) सीट है, जिसे बीजेपी 1998 के बाद हुए किसी भी विधानसभा चुनाव में नहीं जीत सकी है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. साल 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के जीतू भाई हरिभाई चौधरी ने यहां से जीत हासिल की थी. परिसीमन से पहले यह सीट मोटा पोंढा के नाम से अस्तित्व में थी. इसके ज्यादातर हिस्से को शामिल कर 2008 में कपराडा सीट अस्तित्व में आई थी और 1998 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा.

इसी प्रकार परिसीमन से पहले खेड़ा जिले में कठलाल विधानसभा सीट थी. आजादी के बाद हुए सभी चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा. पहली बार, बीजेपी ने 2010 में इस सीट पर उपचुनाव में जीत दर्ज की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

Related Articles

Back to top button